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زُرْ
عروس
الجولان
مجدل شمسٍ
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إنها
السحر
والصباح
المندَّى
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قريةٌ
غادةٌ
تفوق
جمالاً
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ملكات
الجمال
عيناً
وخَدا
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روضةٌ
جنةٌ يفوح
شذاها
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في
رحاب
الجولان
عطراً
وندّا
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كرُمت
محتداً
ورقّت
نسيماً
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وزهت
خضرةً
وزهراً
ووردا
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خمرة
الروح من
بنات
الدوالي
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ما
أحبَّ
الحياة
خمراً
وشهدا
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منظر
المرج
قربها
والروابي
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رونق
الغانيات
صدراً
ونهدا
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إنّها
المجدل
المجيدة
رمزٌ
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لشموخٍ
سهلاً
وغوراً
ونجدا
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إنّها
المجدل
الأبية
تاجٌ
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للعلا
في
التاريخ
عقداً
فعقدا
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رُبَّ
غازٍ
أَقرَّ
بعد
اختبارٍ
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أن
فيها
للغزو
موتاً
ولحدا
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لم
تُلِنْ
عودها
شراسة
حربٍ
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والرصاص
الفتّاك
يحصد حصدا
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دفعت
دون عزّها
شهداءً
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وأحالت
مهازل
الدهر
جدّا
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كم
شهيدٍ لم
يخش هولاً
شديداً
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كان
في المعرك
الأغرّ
الأشدّا
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جرّعتها
الأيام
مرّاً
وحلواً
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وأراها
الزمان
ضيقاً
ورغدا
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هكذا
تستوي
الحياة
نقاضاً
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وتمرّ
الأحداث
أخذاً
وردّا
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هكذا
يقظة
الشعوب
تلاقي
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ما
تلاقي
البحار
جزراً
ومدّا
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***
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في
مغاني
الجولان
تختال
تيهاً
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فاتنات
الظباء
وفداً
فوفدا
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موطنٌ
كوثر
المناهل
يحوي
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بين
أعطافه
نموراً
وأُسْدا
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جوّه
رائع
الصفاء
بهيٌّ
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ورياض
أبهي
وأحلى
وأندى
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شعبه
قمّة
المعالي
عظيمٌ
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يتسامى
خلقاً
ويحفظ
عهدا
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الرجال
الأبطال
فخرُ
العذارى
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وحماة
الحمى
شيوخاً
ومردا
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فلدى
الصيد
للبطولات
عشقٌ
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يتلظّى
فيهم
هياماً
ووجدا
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والمروءات،
وهي خير
السجايا،
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ورثوها
عمّاً
وخالاً
وجدّا
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لا
يهاب
الجولان
أيَّ
صراعٍ
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لا،
لا يرهب
العدوّ
الألدّا
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لم
يزل
رافضاً
بغيض
احتلال
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ومغيضاً
مستعمراً
مستبدّا
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لم
يزل يكره
اغتصاب
أراضٍ
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وعلى
الغاصبين
يزداد
حقدا
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لم
يزل- طالما
المرابع
أسرى-
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لكفاح
مستنفراً
مستعدّا
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فشظايا
بركانه
ليس تخبو
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وعواتي
إعصاره
ليس تهدا
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بين
جنبيه
نخوةٌ ما
توانت
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عن
نداء
الملهوف
قرباً
وبعدا
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أمّه
سوريا
العروبة
أَنْمَتْ
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في
شرايينه
إباءً
ومجدا
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في
صميم
الجولان
حبٌّ
كبيرٌ
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للميامين
في العرين
المفدّى
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حيِّ
شعباً
فطيناً
ذكيّاً
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في
تلقّي
العلوم
بنداً
فبندا
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عربيّاً
قُحّاً
لساناً
وقلباً
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سامياً
فكرة
ونبلاً
وقصدا
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عربيّاً
بطولةً
ونضالاً
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يتجلّى
صدقاً
ويصدق
وعدا
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حاضناً
أرضه
احتضان
وليدٍ
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عاشقٍ
من أمومة
الأرض
مهدا
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صائناً
أرضه
صيانة
عرضٍ
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عارفاً
حقّها
جهاداً
وجُهدا
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أرضه،
مثل نفسه،
يبتغيها
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حرّة
تنبذ
المعيشة
قيدا
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حفنةٌ
من ترابها
تتساوى
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مع
كنوز
الأنام
عدّا
ونقدا
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يُثمر
الوعي،
وهو أشهى
ثمارٍ،
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في
ثنايا
العقول
هدياً
ورشدا
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